मन की बात में पीएम मोदी ने युवाओं से की बड़ी अपील- जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाएं
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
प्रधानमंत्री ने मन की बात में जल संरक्षण को राष्ट्रीय कर्तव्य बताते हुए जनता से पानी बचाने को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की। वर्षा जल संग्रहण, तालाब पुनर्जीवन और जन-भागीदारी के सफल उदाहरणों से देशभर में जलस्तर में सुधार के संकेत मिले हैं।
युवाओं और स्टार्टअप्स को स्मार्ट वॉटर मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
नई दिल्ली / ‘मन की बात’ की 128वीं कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण को राष्ट्रीय अभियान के रूप में अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश के कई क्षेत्र पानी की कमी से जूझ रहे हैं और हर नागरिक को जिम्मेदारी लेकर जल-संरक्षण को जीवनशैली बनाना होगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि बीते वर्षों में “कैच द रेन”, “जल शक्ति अभियान” और कई राज्यों की स्थानीय पहलों ने उल्लेखनीय सकारात्मक प्रभाव दिखाए हैं।
मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि जल संकट केवल सरकारों के प्रयासों से नहीं सुलझेगा, बल्कि हर परिवार, हर गांव और हर शहर को इसमें बराबर की भूमिका निभानी होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि देशभर में हजारों ऐसे गाँव हैं, जहाँ जनता ने स्वयं तालाबों का पुनरुद्धार किया, पुराने कुओं की सफाई की और वर्षा जल संग्रहण को सुनिश्चित किया। इससे जलस्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है।
प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि पानी बचाना कोई विकल्प नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रखने की अनिवार्यता है। उन्होंने स्कूल-कॉलेजों को जल-जागरूकता कार्यक्रम चलाने, तकनीकी संस्थानों को नए जल संरक्षण उपकरण विकसित करने और स्टार्टअप्स को स्मार्ट वाटर मैनेजमेंट के लिए प्रेरित किया।
मोदी ने बताया कि कई शहरों में वर्षा जल को सीधे पेयजल प्लांट से जोड़ने की तकनीक पर काम चल रहा है। यह मॉडल भविष्य में देशभर के शहरी क्षेत्रों के लिए समाधन बन सकता है। उन्होंने पानी की बर्बादी पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि यदि आज हम नहीं जागे, तो आने वाले समय में हालात और कठिन हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने घरों में पानी बचाने के सरल उपाय अपनाएँ- जैसे छोटी बौछार वाले शावर, लीक-proof नल, वर्षा जल harvesting और रसोई-बाथरूम में disciplined water usage। उन्होंने कहा कि “जनशक्ति” यदि “जलशक्ति” के लिए खड़ी हो जाए, तो भारत आने वाली सदी का जल-सुरक्षित राष्ट्र बन सकता है।